दूसरे राज्य में गाड़ी ले जाना होगा आसान: सरकार खत्म कर सकती है NOC की अनिवार्यता
यदि आप नौकरी या किसी अन्य कारण से एक राज्य से दूसरे राज्य में शिफ्ट होने की योजना बना रहे हैं, तो आपके लिए एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर है। मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट और ‘NDTV Auto’ के अनुसार, केंद्र सरकार अंतर-राज्यीय वाहन ट्रांसफर (Inter-state Vehicle Transfer) के लिए लगने वाले No Objection Certificate (NOC) की अनिवार्य शर्त को खत्म करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। नीति आयोग (NITI Aayog) द्वारा गठित एक उच्च-स्तरीय समिति ने इस प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए ‘ऑटो-जनरेटेड क्लियरेंस सिस्टम’ (Auto-generated Clearance System) लागू करने की सिफारिश की है, जिससे करोड़ों वाहन मालिकों को आरटीओ (RTO) के चक्कर काटने से मुक्ति मिल जाएगी।
क्यों उठाई गई NOC खत्म करने की मांग?
वर्तमान नियमों के अनुसार, यदि आप अपनी गाड़ी को 12 महीने से अधिक समय के लिए किसी दूसरे राज्य में ले जाते हैं, तो आपको मूल राज्य के आरटीओ से NOC लेना अनिवार्य होता है। यह प्रक्रिया काफी जटिल और समय लेने वाली होती है, जिसमें हफ्तों का समय लग जाता है। समिति का मानना है कि अब जबकि देश के लगभग सभी आरटीओ VAHAN डेटाबेस के जरिए आपस में जुड़े हुए हैं, तो फिजिकल एनओसी की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है। डिजिटल डेटाबेस के जरिए नए राज्य का आरटीओ खुद ही यह चेक कर सकता है कि गाड़ी पर कोई टैक्स बकाया, चालान या कानूनी मामला तो नहीं है।
VAHAN डेटाबेस और ऑटो-क्लियरेंस का नया सिस्टम
प्रस्तावित योजना के तहत, जब आप नए राज्य में गाड़ी के री-रजिस्ट्रेशन (Re-registration) के लिए आवेदन करेंगे, तो सिस्टम अपने आप ‘वाहन’ पोर्टल से आपकी गाड़ी का सारा रिकॉर्ड निकाल लेगा। यदि गाड़ी पर कोई बकाया नहीं है, तो सिस्टम खुद ही ‘डिजिटल क्लियरेंस’ जारी कर देगा। इससे फिजिकल पेपरवर्क पूरी तरह खत्म हो जाएगा और ट्रांसफर की प्रक्रिया तेज, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त हो जाएगी। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) वर्तमान में इस प्रस्ताव की समीक्षा कर रहा है और जल्द ही इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।
सेकेंड-हैंड कार बाजार और फ्लीट ऑपरेटर्स को फायदा
NOC हटने का सबसे बड़ा लाभ पुरानी कारों के बाजार (Used Car Market) को होगा। अभी लोग दूसरे राज्य की गाड़ियां खरीदने से बचते हैं क्योंकि ट्रांसफर की प्रक्रिया बहुत थकाऊ होती है। इस नियम के आने से गाड़ियों को एक राज्य से दूसरे राज्य में बेचना और खरीदना बहुत आसान हो जाएगा। इसके अलावा, उन कंपनियों और फ्लीट ऑपरेटर्स (Fleet Operators) को भी बड़ी राहत मिलेगी जिनके पास बड़ी संख्या में गाड़ियां हैं और जिन्हें अक्सर अपने बेड़े को अलग-अलग राज्यों में शिफ्ट करना पड़ता है।
उम्र के बजाय ‘फिटनेस’ आधारित नियमों पर भी चर्चा
NOC के अलावा, नीति आयोग की समिति ने एक और महत्वपूर्ण सिफारिश की है। वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों पर पाबंदी है। समिति ने सुझाव दिया है कि गाड़ियों को उनकी उम्र (Age) के आधार पर नहीं, बल्कि उनकी फिटनेस (Fitness) और उत्सर्जन मानकों (Emission Standards) के आधार पर चलाने की अनुमति दी जानी चाहिए। यदि कोई पुरानी गाड़ी फिटनेस टेस्ट पास कर लेती है और प्रदूषण नहीं फैला रही है, तो उसे सड़क पर चलने की अनुमति मिलनी चाहिए।
शिफ्टिंग से पहले ध्यान रखने योग्य बातें
हालांकि यह नियम अभी प्रक्रिया में है, लेकिन वर्तमान में आपको दूसरे राज्य में जाने पर फॉर्म 28 के जरिए एनओसी लेना होता है। साथ ही, नए राज्य में प्रवेश करने के बाद आपको वहां का Road Tax भरना पड़ता है, जिसे भरने के बाद आप अपने पुराने राज्य से टैक्स रिफंड (Tax Refund) के लिए दावा कर सकते हैं। नए नियम के लागू होने के बाद, ये सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल और एकीकृत (Integrated) हो जाएंगी, जिससे आम आदमी का समय और पैसा दोनों बचेगा।









