हुंडई और टीवीएस के बीच इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर के लिए ऐतिहासिक समझौता
भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र में एक बड़े बदलाव के संकेत देते हुए, दक्षिण कोरियाई दिग्गज Hyundai Motor और भारत की प्रमुख दोपहिया व तिपहिया वाहन निर्माता TVS Motor ने 20 अप्रैल 2026 को एक आधिकारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत और अन्य वैश्विक बाजारों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स (E3W) का विकास और व्यवसायीकरण करना है। यह समझौता सियोल में आयोजित ‘2026 कोरिया-इंडिया बिजनेस फोरम’ के दौरान संपन्न हुआ, जो लास्ट-माइल कनेक्टिविटी (अंतिम छोर तक पहुंच) को पूरी तरह से इलेक्ट्रिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
साझेदारी में दोनों कंपनियों की भूमिका
इस ‘ज्वाइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट’ (JDA) के तहत दोनों कंपनियों ने अपनी विशेषज्ञता के आधार पर जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा किया है। हुंडई मुख्य रूप से वाहनों की डिजाइन और इंजीनियरिंग का नेतृत्व करेगी, जिसमें वह अपनी वैश्विक आरएंडडी (R&D) क्षमताओं और मानवीय जरूरतों पर आधारित डिजाइन दृष्टिकोण का उपयोग करेगी। दूसरी ओर, टीवीएस मोटर अपने मौजूदा इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर प्लेटफॉर्म और स्थानीय बाजार की गहरी समझ के साथ इंजीनियरिंग में सहयोग करेगी। इसके अलावा, भारत में इन वाहनों के उत्पादन, घरेलू बिक्री और भविष्य में होने वाले निर्यात का पूरा जिम्मा टीवीएस मोटर के पास होगा।
भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल खास फीचर्स
हुंडई और टीवीएस द्वारा विकसित किए जा रहे ये इलेक्ट्रिक ऑटो विशेष रूप से भारतीय सड़कों, बुनियादी ढांचे और मौसम को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं। इसमें कई ऐसे फीचर्स शामिल किए गए हैं जो इसे बाजार में मौजूद अन्य विकल्पों से अलग बनाएंगे:
एडैप्टिव ग्राउंड क्लीयरेंस: मानसून के दौरान जलभराव वाली सड़कों पर आसानी से चलने के लिए वाहन की ऊंचाई को एडजस्ट किया जा सकेगा।
थर्मल मैनेजमेंट: भारत जैसे गर्म जलवायु वाले देशों के लिए बैटरी और मोटर के तापमान को नियंत्रित करने की उन्नत तकनीक।
फ्लेक्सिबल इंटीरियर: इन वाहनों का उपयोग न केवल यात्रियों को ले जाने के लिए, बल्कि सामान की डिलीवरी (Cargo) और आपातकालीन सेवाओं के लिए भी किया जा सकेगा।
एर्गोनोमिक डिजाइन: चालक की सुविधा के लिए आरामदायक केबिन, ताकि लंबे समय तक काम करने पर भी थकान कम हो।
स्थानीयकरण और भविष्य की संभावनाएं
इस साझेदारी का एक मुख्य स्तंभ ‘लोलाइजेशन’ (स्थानीयकरण) है। समझौते के अनुसार, वाहन के अधिकांश महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इससे न केवल देश में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और घरेलू सप्लाई चेन मजबूत होगी, बल्कि वाहनों की कीमत कम रखने और सर्विसिंग के दौरान स्पेयर पार्ट्स की आसान उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी। 2025 के भारत मोबिलिटी ग्लोबल एक्सपो में इसका पहला प्रोटोटाइप दिखाया गया था, और अब यह प्रोजेक्ट कॉन्सेप्ट से निकलकर बड़े पैमाने पर उत्पादन की ओर बढ़ रहा है।
बाजार पर प्रभाव और प्रतिस्पर्धा
भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा थ्री-व्हीलर बाजार है, और इस क्षेत्र में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाना काफी किफायती साबित हो रहा है। हुंडई और टीवीएस की इस जुगलबंदी का सीधा मुकाबला Mahindra Electric, Piaggio और बजाज जैसे स्थापित खिलाड़ियों से होगा। हुंडई का लक्ष्य अपने ‘शूल’ (Shool) जैसे राइड-पूलिंग ऐप के जरिए इस ईकोसिस्टम को और अधिक डिजिटल और सुलभ बनाना है। जानकारों का मानना है कि हुंडई की वैश्विक तकनीक और टीवीएस की स्थानीय पकड़ का यह मेल भारतीय ऑटो रिक्शा और डिलीवरी सेगमेंट को पूरी तरह से बदलने की क्षमता रखता है।









