दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए अक्सर गुरुग्राम से नोएडा का सफर किसी सिरदर्द से कम नहीं होता है, जहाँ पीक आवर्स के दौरान सड़क मार्ग से दो घंटे से भी ज्यादा का समय लग जाता है। लेकिन अब तकनीक की मदद से यह दूरी महज 15 मिनट में सिमटने वाली है। भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो की निवेश शाखा IndiGo Ventures ने बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप Sarla Aviation में 10 करोड़ रुपये के रणनीतिक निवेश की आधिकारिक घोषणा की है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत के व्यस्त महानगरों में ‘इलेक्ट्रिक एयर टैक्सी’ नेटवर्क स्थापित करना है, जो शहरी परिवहन की परिभाषा को पूरी तरह से बदल कर रख देगा।
इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग (eVTOL) तकनीक
Sarla Aviation जिस तकनीक पर काम कर रही है उसे eVTOL यानी Electric Vertical Take-off and Landing कहा जाता है। सरल शब्दों में कहें तो ये ऐसी उड़ने वाली टैक्सियां हैं जो बिना किसी रनवे के हेलिकॉप्टर की तरह एक ही जगह से सीधे उड़ान भर सकती हैं और लैंड कर सकती हैं। ये पूरी तरह से इलेक्ट्रिक ऊर्जा पर आधारित होंगी, जिससे न केवल शोर कम होगा बल्कि इनसे बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं होगा। कंपनी एक आधुनिक 6-seater यानी छह सीटों वाला विमान विकसित कर रही है जिसे विशेष रूप से भारत जैसे भीड़भाड़ वाले और घने शहरों की जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है।
इंडिगो और सरला एविएशन की रणनीतिक साझेदारी
इस 10 करोड़ रुपये के निवेश के साथ इंडिगो अब भारत के उभरते हुए अर्बन एयर मोबिलिटी (UAM) सेक्टर में मजबूती से कदम रख चुकी है। इस साझेदारी के तहत Sarla Aviation विमानों के तकनीकी विकास और उनके विनिर्माण पर पूरा ध्यान देगी। वहीं दूसरी ओर, इंडिगो अपने विशाल नेटवर्क, विमानों के रख-रखाव के अनुभव और परिचालन क्षमताओं का उपयोग करके इस सेवा को व्यावसायिक रूप से सफल बनाने में मदद करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी सड़क मार्ग के भारी दबाव को कम करने और लोगों के कीमती समय को बचाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगी।
संभावित रूट्स और भविष्य की योजनाएं
कंपनियों ने शुरुआत में कुछ ऐसे प्रमुख रास्तों की पहचान की है जहाँ वर्तमान में सड़क मार्ग से समय बहुत ज्यादा लगता है। गुरुग्राम से नोएडा के अलावा, बेंगलुरु हवाई अड्डे से इलेक्ट्रॉनिक सिटी तक का रूट भी इसमें शामिल है, जहाँ वर्तमान में लगभग 90 मिनट लगते हैं लेकिन एयर टैक्सी के जरिए यह सफर मात्र 10 से 15 मिनट में पूरा हो सकेगा। कंपनी का लक्ष्य मुख्य रूप से 30 से 300 किलोमीटर तक के उन बीच के रास्तों को कवर करना है जो वर्तमान रेल या हवाई नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़े हुए नहीं हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में इन इलेक्ट्रिक उड़ने वाली टैक्सियों का परिचालन साल 2028 तक पूरी तरह से शुरू होने की उम्मीद है।
हवाई यात्रा को आम आदमी की पहुंच में लाना
Sarla Aviation के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी एड्रियन श्मिट का कहना है कि दशकों से भारतीयों ने यह मान लिया है कि दूरी का मतलब देरी है, लेकिन अब इस धारणा को बदलने का समय आ गया है। कंपनी का उद्देश्य इन एयर टैक्सियों को इतना किफायती बनाना है कि यह केवल अमीरों तक सीमित न रहे, बल्कि एक आम मध्यमवर्गीय व्यक्ति भी इसका लाभ उठा सके। हेलिकॉप्टर के मुकाबले इनका परिचालन खर्च काफी कम होगा, जिससे इनकी टिकट दरें काफी प्रतिस्पर्धी रहने की संभावना है। यदि यह प्रोजेक्ट सफल रहता है तो भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो जाएगा जहाँ शहरी परिवहन के लिए नियमित रूप से एयर टैक्सी सेवा उपलब्ध है।









