राजस्थान पुलिस का अजीबोगरीब कारनामा! EV का भी काट दिया Pollution चालान, ये मजाक है या सिस्टम फेल?

By mansi

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राजस्थान के नागौर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है और पुलिस प्रशासन की तकनीकी जानकारी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट और TV9 Hindi के अनुसार, नागौर के कृषि मंडी तिराहे पर ट्रैफिक पुलिस ने एक Tata Tiago EV (इलेक्ट्रिक कार) को रोककर उसका PUC (Pollution Under Control) सर्टिफिकेट न होने के कारण 1,500 रुपये का भारी-भरकम चालान काट दिया।

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यह घटना उस समय हुई जब पुलिस रूटीन चेकिंग कर रही थी। इलेक्ट्रिक गाड़ियाँ बैटरी से चलती हैं और उनमें किसी भी तरह का साइलेंसर या धुआं निकलने का रास्ता नहीं होता है, इसके बावजूद पुलिस अधिकारी द्वारा प्रदूषण का जुर्माना लगाना चर्चा का विषय बन गया है।

काले शीशे से शुरू हुआ विवाद और ‘पॉल्यूशन’ पर खत्म

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) ने एक Tata Tiago EV को उसके शीशों पर लगे काले सनशेड्स (Sunshades) के कारण रोका। पुलिस अधिकारी ने शुरू में काले शीशे के उपयोग के लिए 200 रुपये का जुर्माना लगाया। इसी दौरान कार मालिक और पुलिस अधिकारी के बीच बहस शुरू हो गई। कार चालक का कहना था कि वह केवल धूप से बचने के लिए सनशेड्स का उपयोग कर रहा है।

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बहस बढ़ने पर पुलिस अधिकारी ने ई-चालान मशीन (POS Machine) में गाड़ी का नंबर डाला। मशीन ने प्रदूषण प्रमाणपत्र का कॉलम ‘निल’ (NIL) दिखाया, जिसे आधार मानकर पुलिस ने बिना सोचे-समझे 1,500 रुपये का अतिरिक्त प्रदूषण चालान थमा दिया।

चालक की दलील और पुलिस का अड़ियल रवैया

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में कार चालक पुलिस अधिकारी को लगातार यह समझाने की कोशिश कर रहा है कि यह एक Electric Vehicle (EV) है। चालक ने बार-बार कहा कि “साहब, इस गाड़ी में इंजन ही नहीं है और न ही इसमें साइलेंसर लगा है, तो फिर प्रदूषण कैसे होगा?” चालक ने यह भी बताया कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रदूषण जांच से पूरी तरह छूट मिली हुई है।

इसके बावजूद पुलिस अधिकारी ने एक न सुनी और तर्क दिया कि मशीन जो दिखा रही है, उसी के आधार पर चालान काटा जाएगा। अधिकारी का यह अड़ियल रवैया न केवल नियमों के उल्लंघन को दर्शाता है, बल्कि विभाग की तकनीकी समझ की कमी को भी उजागर करता है।

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क्या इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए PUC सर्टिफिकेट अनिवार्य है?

भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के स्पष्ट दिशानिर्देशों और Central Motor Vehicles Rules (CMVR), 1989 के अनुसार, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs) को PUC सर्टिफिकेट की आवश्यकता नहीं होती है। चूंकि ये गाड़ियाँ बैटरी से चलती हैं और इनमें पेट्रोल या डीजल जैसे जीवाश्म ईंधन का दहन नहीं होता, इसलिए इनसे किसी भी तरह का हानिकारक उत्सर्जन (Tailpipe Emission) नहीं होता है।

यही कारण है कि प्रदूषण जांच केंद्र भी इलेक्ट्रिक गाड़ियों की जांच नहीं करते। राजस्थान की इस घटना ने एक बार फिर से यह स्पष्ट कर दिया है कि ज़मीनी स्तर पर तैनात ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को नए ऑटोमोबाइल नियमों और इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रावधानों के बारे में उचित प्रशिक्षण की सख्त जरूरत है।

पुलिस विभाग की सफाई और जांच के आदेश

जैसे ही इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर वायरल हुआ और लोगों ने राजस्थान पुलिस का मजाक उड़ाना शुरू किया, वैसे ही उच्च अधिकारी हरकत में आ गए। नागौर ट्रैफिक पुलिस के प्रभारी ने स्वीकार किया कि यह चालान “अनजाने में हुई एक मानवीय भूल” थी। जिला परिवहन अधिकारी (DTO) ने भी स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रदूषण सर्टिफिकेट की कोई कानूनी अनिवार्यता नहीं है।

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पुलिस विभाग ने अब इस पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित अधिकारी से जवाब मांगा गया है। साथ ही, कार मालिक को आश्वासन दिया गया है कि गलत तरीके से लगाया गया यह 1,500 रुपये का जुर्माना सिस्टम से हटा दिया जाएगा और चालान रद्द कर दिया जाएगा।

घटना के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया

इस घटना के बाद इंटरनेट यूजर्स ने राजस्थान पुलिस की जमकर क्लास लगाई है। कई लोगों ने तंज कसते हुए लिखा कि “अब शायद पुलिस साइकिल चलाने वालों से हेलमेट और बैलगाड़ी वालों से स्पीडोमीटर मांगने लगेगी।” कुछ यूजर्स ने सड़क परिवहन मंत्रालय को टैग करते हुए ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के लिए विशेष रिफ्रेशर कोर्स चलाने की मांग की है।

यह मामला न केवल एक गलत चालान का उदाहरण है, बल्कि यह भविष्य में बढ़ते इलेक्ट्रिक वाहनों के दौर में पुलिस की भूमिका और उनकी तकनीकी तैयारी पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटना ने देशभर के इलेक्ट्रिक कार मालिकों को एक बार फिर से उनके अधिकारों और नियमों के प्रति जागरूक होने का मौका दिया है।

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