भारत में Tesla की हालत खराब! 7 महीनों में बस इतनी गाड़ियां बिकीं 😳

By mansi

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एलन मस्क के नेतृत्व वाली दिग्गज इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी Tesla के लिए भारत में शुरुआती सफर काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। अप्रैल 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार भारत में अपनी पहली कार Tesla Model Y लॉन्च करने के लगभग सात महीनों बाद भी कंपनी ग्राहकों को बड़े पैमाने पर आकर्षित करने में संघर्ष कर रही है। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के ताजा आंकड़ों ने भारत के प्रीमियम इलेक्ट्रिक वाहन सेगमेंट में टेस्ला की सुस्त पकड़ को उजागर किया है जो कंपनी के वैश्विक दबदबे के ठीक विपरीत नजर आती है।

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FADA रिपोर्ट और वित्त वर्ष 2026 की बिक्री के आंकड़े

FADA द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार Tesla India Motors ने वित्त वर्ष 2025-26 में कुल 342 कारों की ही बिक्री की है। इस हिसाब से देखा जाए तो भारत में टेस्ला की औसत बिक्री मात्र 43 कारें प्रति माह रही है। टेस्ला ने जुलाई 2025 में बड़े उत्साह के साथ मुंबई के BKC में अपना पहला एक्सपीरियंस सेंटर खोलकर परिचालन शुरू किया था। हालांकि शुरुआती हफ्तों में मिली अच्छी पूछताछ और लगभग 600 बुकिंग्स के बावजूद कंपनी इन बुकिंग्स को वास्तविक डिलीवरी में बदलने में काफी हद तक विफल रही है।

Model Y की भारी कीमत और आयात शुल्क का प्रभाव

भारत में टेस्ला की सुस्त मांग का सबसे बड़ा कारण इसकी अत्यधिक कीमत को माना जा रहा है। टेस्ला ने Model Y को भारत में 59.89 लाख रुपये की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत पर लॉन्च किया था। स्थानीय स्तर पर उत्पादन न होने के कारण इन कारों को पूरी तरह से विदेश से आयात किया जाता है जिस पर 100 से 110 प्रतिशत तक का भारी कस्टम शुल्क लगता है। इसके परिणामस्वरूप अमेरिका में एक मध्यम वर्गीय क्रॉसओवर मानी जाने वाली Model Y भारत में एक ‘लक्जरी’ सेगमेंट की गाड़ी बन गई है जिससे इसका सीधा मुकाबला BMW iX1 और BYD Sealion 7 जैसे स्थापित और फीचर-लोडेड प्रतिद्वंद्वियों से हो रहा है।

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स्टॉक खाली करने के लिए ₹2 लाख तक की नकद छूट

मांग में आई कमी और बिना बिके वाहनों के बढ़ते दबाव को देखते हुए टेस्ला ने भारत में एक बड़ा कदम उठाया है। रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी अपने पुराने स्टॉक को निकालने के लिए Model Y के चुनिंदा वेरिएंट्स पर 2.00 लाख रुपये तक की नकद छूट ऑफर कर रही है। यह टेस्ला जैसी कंपनी के लिए काफी दुर्लभ कदम है क्योंकि यह ब्रांड आमतौर पर अपनी फिक्स्ड प्राइस पॉलिसी के लिए जाना जाता है। बताया जा रहा है कि शुरुआत में आयात किए गए वाहनों के पहले बैच में से कई गाड़ियाँ अभी भी शोरूम्स में खरीदारों का इंतजार कर रही हैं।

प्रतिद्वंद्वियों से मिल रही कड़ी प्रतिस्पर्धा

जहाँ टेस्ला बिक्री के लिए संघर्ष कर रही है वहीं अन्य इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के लिए बीता वित्त वर्ष काफी शानदार रहा है। BMW India की इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री में पिछले साल जबरदस्त उछाल देखा गया है। इसके अलावा चीनी दिग्गज BYD ने अपनी Sealion 7 और Atto 3 के दम पर टेस्ला के मुकाबले कहीं अधिक मजबूत प्रदर्शन किया है। भारतीय ग्राहक अब उन गाड़ियों को अधिक प्राथमिकता दे रहे हैं जो स्थानीय स्तर पर असेंबल होने के कारण कम कीमत पर उपलब्ध हैं और जिनमें भारतीय सड़कों की परिस्थितियों के अनुसार अधिक फीचर्स दिए गए हैं।

टेस्ला का भारत में भविष्य और आगामी रणनीति

वर्तमान चुनौतियों के बावजूद टेस्ला भारत में अपनी जड़ें जमाने की कोशिश में जुटी है। कंपनी ने हाल ही में दिल्ली के Aerocity में अपना दूसरा बड़ा शोरूम खोला है। एलन मस्क ने पहले ही स्पष्ट किया है कि भारत में टेस्ला की वास्तविक सफलता तभी संभव है जब वे स्थानीय स्तर पर 20 लाख से 25 लाख रुपये की रेंज वाली किफायती ईवी का उत्पादन शुरू करेंगे। फिलहाल Model Y के जरिए टेस्ला केवल प्रीमियम सेगमेंट को लक्षित कर रही है जहाँ ऊंचे आयात शुल्क और सीमित चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर इसकी प्रगति की राह में बड़े रोड़े बने हुए हैं।

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