मुंबई के सबसे व्यस्त बिजनेस हब, बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC), में यातायात की समस्या को दूर करने के लिए भारत की पहली ड्राइवरलेस पॉड टैक्सी (Automated Rapid Transit System) परियोजना का आगाज हो चुका है। 7 अप्रैल 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार की उपस्थिति में इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का भूमिपूजन किया। यह प्रोजेक्ट मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (MMRDA) द्वारा क्रियान्वित किया जा रहा है और इसका मुख्य उद्देश्य बांद्रा और कुर्ला रेलवे स्टेशनों से BKC आने-जाने वाले लाखों यात्रियों को ‘लास्ट-माइल कनेक्टिविटी’ प्रदान करना है।
प्रोजेक्ट का रूट और मुख्य चरण
पॉड टैक्सी का पूरा नेटवर्क लगभग 8.85 किलोमीटर लंबा होगा, जिसे अलग-अलग चरणों में विकसित किया जाएगा। इसके पहले चरण (Phase I) में बांद्रा (पूर्व) और कुर्ला के बीच 3.36 किलोमीटर का स्ट्रेच तैयार किया जाएगा, जिसे अगले 20 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यह रूट LBS मार्ग, कलानगर और BKC जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को जोड़ेगा। पूरे रूट पर कुल 22 एयर-कंडीशन स्टेशन बनाए जाएंगे, जो औसतन हर 200 मीटर की दूरी पर स्थित होंगे। यह सिस्टम मेट्रो लाइन 3 (BKC में) और मेट्रो लाइन 2B (ITO और IL&FS स्टेशनों के पास) के साथ भी एकीकृत होगा।
पॉड टैक्सी की तकनीक और विशेषताएं
यह पूरी तरह से एक Autonomous (ड्राइवरलेस) और AI-आधारित प्रणाली होगी जो बिजली (बैटरी) से चलेगी। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
क्षमता: प्रत्येक पॉड में एक समय में 6 यात्री बैठ सकेंगे।
रफ्तार: ये पॉड अधिकतम 40 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ेंगे।
फ्रीक्वेंसी: यात्रियों को लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि हर 15 सेकंड के अंतराल पर एक पॉड उपलब्ध होगा।
ऑन-डिमांड स्टॉप: इस सिस्टम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि पॉड केवल उन्हीं स्टेशनों पर रुकेंगे जिन्हें यात्रियों ने चुना होगा, जिससे यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
लागत और किराया संरचना
इस प्रोजेक्ट को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 1,017 करोड़ रुपये है। सबसे अच्छी बात यह है कि इस प्रोजेक्ट का वित्तीय भार राज्य सरकार या MMRDA पर नहीं पड़ेगा। एक तकनीकी-आर्थिक व्यवहार्यता अध्ययन (TEFS) के अनुसार, इसका किराया 21 रुपये प्रति किलोमीटर प्रस्तावित किया गया है, जिसमें परिचालन लागत को देखते हुए हर साल 4 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। यह किराया मौजूदा ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के मुकाबले काफी प्रतिस्पर्धी रहने की उम्मीद है।
यात्रियों के लिए लाभ और भविष्य
BKC में रोजाना करीब 4 से 6 लाख लोग काम के सिलसिले में आते हैं। बुलेट ट्रेन और नए कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के आने से यह संख्या और बढ़ने वाली है। पॉड टैक्सी सिस्टम के शुरू होने से न केवल सड़कों पर भीड़ कम होगी, बल्कि प्रदूषण में भी कमी आएगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह सिस्टम यात्रियों को उनके ऑफिस से मात्र 100-150 मीटर की दूरी पर छोड़ेगा। इसके साथ ही BKC में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सुरंगों का एक नेटवर्क भी विकसित किया जा रहा है, जो बांद्रा-वर्ली सी लिंक को सीधे BKC और एयरपोर्ट से जोड़ेगा। 2031 तक इस पॉड टैक्सी सिस्टम से रोजाना 1.09 लाख से अधिक यात्रियों के सफर करने का अनुमान है।









