Range Extender Electric Vehicle: बैटरी खत्म होने की चिंता से आजादी
हम अक्सर सुनते हैं कि लोग Electric Vehicle (EV) खरीदने से इसलिए डरते हैं क्योंकि उन्हें “Range Anxiety” यानी रास्ते में बैटरी खत्म हो जाने का डर सताता है। इसी समस्या का समाधान करने के लिए अब Range Extender Electric Vehicle (REEV) तकनीक काफी चर्चा में है। सरल शब्दों में कहें तो यह एक ऐसी इलेक्ट्रिक कार है जो अपनी बैटरी खुद चार्ज करने की क्षमता रखती है। यह तकनीक उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो सकती है जो लंबी दूरी की यात्रा करना चाहते हैं लेकिन चार्जिंग स्टेशनों की कमी के कारण हिचकिचाते हैं।
क्या है REEV तकनीक और यह कैसे काम करती है?
Range Extender Electric Vehicle को आप एक तरह का “इलेक्ट्रिक व्हीकल का एक्सटेंशन” मान सकते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें एक छोटा Petrol Engine लगा होता है, लेकिन यह इंजन सीधे तौर पर गाड़ी के पहियों को नहीं घुमाता। इस तकनीक में गाड़ी को चलाने का पूरा काम केवल Electric Motor ही करती है।
यहाँ इंजन का एकमात्र काम एक Generator की तरह काम करना होता है। जब गाड़ी चलते-चलते एक निश्चित स्तर से नीचे डिस्चार्ज हो जाती है, तो यह पेट्रोल इंजन अपने आप चालू हो जाता है और जेनरेटर को पावर देता है। यह जेनरेटर बिजली पैदा करता है जिससे बैटरी चार्ज होने लगती है और मोटर को पावर मिलती रहती है। इस तरह, आपको बीच रास्ते में गाड़ी रुकने का डर नहीं रहता और आप पेट्रोल की मदद से अपनी यात्रा जारी रख सकते हैं।
हाइब्रिड और REEV के बीच का मुख्य अंतर
अक्सर लोग REEV को Hybrid कारों के साथ मिला देते हैं, लेकिन इन दोनों के काम करने के तरीके में बहुत बड़ा अंतर है। एक सामान्य Hybrid या Strong Hybrid कार में Petrol Engine और Electric Motor दोनों ही जरूरत पड़ने पर पहियों को पावर देते हैं। यानी हाइब्रिड कार सीधे तौर पर पेट्रोल से भी चल सकती है।
इसके विपरीत, REEV में पहियों का सीधा संपर्क इंजन से नहीं होता है; गाड़ी हमेशा बैटरी और मोटर पर ही चलती है। REEV को आप घर पर प्लग लगाकर एक सामान्य EV की तरह चार्ज कर सकते हैं और इसे शुद्ध इलेक्ट्रिक मोड पर चला सकते हैं। पेट्रोल इंजन केवल एक बैकअप या “रेंज बढ़ाने वाले” उपकरण के रूप में काम करता है। यही कारण है कि इसे हाइब्रिड से अलग और भविष्य की एक बेहतर कड़ी माना जा रहा है।
REEV तकनीक के फायदे और इसकी जरूरत
इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह आपको एक ही गाड़ी में Electric Vehicle की शांति और Petrol Car की निश्चिंतता प्रदान करती है। शहर के अंदर आप इसे केवल बैटरी पर चला सकते हैं जिससे प्रदूषण शून्य रहता है और चलाने का खर्च भी बहुत कम आता है। वहीं हाईवे पर लंबी यात्रा के दौरान अगर बैटरी कम हो जाए, तो आप बस पेट्रोल भरवाकर सफर जारी रख सकते हैं।
आपको घंटों तक चार्जिंग स्टेशन पर रुकने की जरूरत नहीं पड़ती। इसके अलावा, चूंकि इसमें बैटरी को लगातार चार्ज करने की सुविधा होती है, इसलिए कंपनियों को बहुत बड़ी और भारी बैटरी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे गाड़ी का वजन कम रहता है। भारतीय बाजार में जहाँ अभी भी बुनियादी चार्जिंग ढांचे का विकास हो रहा है, वहाँ REEV जैसी तकनीक एक बहुत ही व्यावहारिक समाधान पेश करती है।
भारत में REEV का भविष्य और विकल्प
दुनिया भर में कई कंपनियां अब इस तकनीक पर तेज़ी से काम कर रही हैं। उदाहरण के तौर पर, Leapmotor जैसे ब्रांड इस तकनीक के साथ भारत में कदम रखने की तैयारी कर रहे हैं। यहाँ तक कि भारतीय दिग्गजों जैसे Maruti Suzuki और Hyundai ने भी भविष्य के लिए इस तकनीक में रुचि दिखाई है।
फिलहाल भारत में REEV मॉडल बहुत कम हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे पेट्रोल की कीमतें बढ़ेंगी और शुद्ध इलेक्ट्रिक गाड़ियों को अपनाने में समय लगेगा, REEV एक बहुत ही लोकप्रिय विकल्प बनकर उभरेगा। यह तकनीक विशेष रूप से उन इलाकों के लिए बेहतरीन है जहाँ बिजली की कटौती ज्यादा होती है या जहाँ चार्जिंग पोर्ट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। आने वाले कुछ वर्षों में हमें कई बजट अनुकूल और प्रीमियम REEV गाड़ियां सड़कों पर देखने को मिल सकती हैं।









